March 18, 2026

प्रॉफिट के चक्कर में देरी, महंगाई और झूठे वादे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

नई दिल्ली, 16 नवंबर। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति को सिर्फ नारे में नहीं, बल्कि काम में दिखाना होगा। प्रॉफिट के चक्कर में देरी, महंगाई और झूठे वादे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। 14 नवंबर को यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) में आयोजित सेमिनार में बोलते हुए सीडीएस ने साफ शब्दों में कहा, “हम उद्योग से अपेक्षा करते हैं कि आपके प्रॉफिट-ड्रिवन प्रयासों में थोड़ी राष्ट्रवाद और देशभक्ति हो।”

उन्होंने देरी, अधिक वादे और महंगी कीमतों पर निशाना साधा, जो सेना की क्षमता को कमजोर कर रही हैं।घटना का बैकग्राउंड: ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन 2.0 में खुली बातचीतसीडीएस का यह बयान रक्षा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), स्वायत्त प्रणालियां, भविष्य की तकनीकें और विस्फोटक सामग्री पर केंद्रित ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन 2.0’ के दौरान आया।

पीएसयू, निजी क्षेत्र, एमएसएमई, डीआरडीओ और अकादमिक जगत के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सीडीएस ने पीएसयू, निजी कंपनियों और छोटे उद्योगों की रक्षा निर्माण में योगदान की सराहना की, लेकिन साथ ही कमियों पर भी इशारा किया।उन्होंने कहा, “रक्षा सुधार एकतरफा सड़क नहीं है।

उद्योग को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।” विशेष रूप से इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (ईपी) के तहत दिए गए ऑर्डरों पर फोकस करते हुए सीडीएस ने बताया कि सेना ने पांचवीं और छठी ईपी चक्रों में कई कंपनियां ओवर-प्रॉमिस कर चुकी हैं, लेकिन समय पर डिलीवरी नहीं हो पाई।

ईपी के तहत 300 करोड़ रुपये तक के कॉन्ट्रैक्ट बिना लंबी प्रक्रिया के दिए जाते हैं, ताकि मिसाइल, ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी जरूरी चीजें जल्दी मिल सकें। लेकिन कंपनियां समय पर न देने से “क्षमता का नुकसान” हो रहा है।

क्यों साधा निशाना ? कीमत, डिलीवरी और ईमानदारी पर जोरसीडीएस ने तीन मुख्य समस्याओं पर दो टूक बात की:डिलीवरी में देरी: “अगर आप कॉन्ट्रैक्ट साइन करते हैं और समय पर डिलीवर नहीं करते, तो यह खोई हुई क्षमता है। हमें बीच में न छोड़ें।” उन्होंने उदाहरण दिया कि कई कंपनियां इमरजेंसी ऑर्डरों पर फेल हो गईं, जिससे सेना का स्टॉक रिचार्ज प्रभावित हो रहा है।
महंगी कीमतें -“उत्पाद महंगे नहीं होने चाहिए। कॉस्ट कॉम्पिटिटिव रहना जरूरी है—न सिर्फ भारतीय सेना के लिए, बल्कि विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए।” भारत अब रक्षा निर्यातक बन रहा है (टाटा, एलएंडटी, कल्याणी ग्रुप जैसी कंपनियां पहले ही एक्सपोर्ट कर रही हैं), लेकिन अगर उत्पाद महंगे होंगे, तो ग्लोबल मार्केट में हारेंगे।
झूठे दावे और स्वदेशी सामग्री: कई कंपनियां उत्पादों को 70% स्वदेशी बताती हैं, लेकिन वास्तव में वे इम्पोर्टेड पार्ट्स असेंबल कर रही होती हैं। सीडीएस ने कहा, “अपनी वास्तविक क्षमताओं के बारे में ईमानदार रहें। स्वदेशी दावों में झूठ न बोलें।” यह ‘मेक इन इंडिया’ को कमजोर कर रहा है।

सीडीएस ने जोर दिया कि नई चुनौतियां (जैसे मल्टी-डोमेन वॉरफेयर) में तेजी से बदलाव हो रहा है। देरी या खराब क्वालिटी से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “देशभक्ति को प्रॉफिट के साथ जोड़ें, लेकिन प्रॉफिट को देशभक्ति पर हावी न होने दें।”

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