
कोलकाता/मुर्शिदाबाद, 30 दिसंबर 2025 । पश्चिम बंगाल में मंदिर-मस्जिद को लेकर चल रही सियासी तकरार थमने का नाम नहीं ले रही है। टीएमसी से निलंबित विधायक और अब जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ताजा ऐलान पर तीखा हमला बोला है।
ममता ने राज्य के सबसे बड़े महाकाल मंदिर (सिलिगुड़ी के माटीगढ़ा में प्रस्तावित) के बारे में बड़ा अपडेट देते हुए इसका जल्द निर्माण शुरू करने की घोषणा की। हुमायूं कबीर ने इसे “हिंदू तुष्टिकरण” करार दिया और कहा कि ममता बनर्जी सार्वजनिक पैसे से मंदिर बनवा रही हैं, जबकि उनकी बाबरी मस्जिद की मुहिम को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
कबीर ने आरोप लगाया:”ममता बनर्जी दीघा में जगन्नाथ मंदिर, दुर्गा कार्निवल और अब महाकाल मंदिर बनवा रही हैं – यह सब हिंदू वोटों के लिए है। लेकिन जब मुस्लिम समुदाय अपनी मस्जिद बनवाता है, तो इसे सांप्रदायिक कहकर दबाया जाता है। यह दोहरा मापदंड है।”

कबीर ने आगे कहा कि उनकी बाबरी मस्जिद (मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में) चंदे से बन रही है, सार्वजनिक पैसा नहीं लग रहा। उन्होंने ममता पर आरएसएस के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया और कहा कि 2026 के चुनाव में मुस्लिम वोट उनकी पार्टी को जाएंगे।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि- 6 दिसंबर 2025 को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद की नींव रखी। हजारों की भीड़ जुटने से मुस्लिम समुदाय में वे हीरो बन गए। इसके बाद टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया, इसे सांप्रदायिक राजनीति बताया।
कबीर ने अपनी नई पार्टी जन उन्नयन पार्टी लॉन्च की और 2026 चुनाव में टीएमसी को चुनौती दी।
महाकाल मंदिर की घोषणा-29 दिसंबर 2025 को ममता बनर्जी ने महाकाल मंदिर की घोषणा की, जिसे राजनीतिक हलकों में कबीर की बाबरी मुहिम की काट माना जा रहा है।
बीजेपी का हमला-बीजेपी ने ममता पर तुष्टिकरण और सॉफ्ट हिंदुत्व दोनों करने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह सब 2026 चुनाव के लिए वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने कबीर को भी टीएमसी का पुराना सहयोगी बताया।
टीएमसी का पक्ष – टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि मंदिर-मस्जिद की राजनीति करने वाले बीजेपी से अलग नहीं। उन्होंने कबीर पर तंज कसा कि वे पहले बीजेपी में थे, जो “मस्जिद गिराने” वाली पार्टी है।यह विवाद 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की सियासत को और गरमा रहा है। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट बैंक की लड़ाई तेज हो गई है। आगे की सुनवाई और राजनीतिक दांव पर नजर रहेगी ।