
लखनऊ, स्टेट डेस्क। सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष कार्य बल (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हत्याकांड के दोनों शूटरों को पुलिस ने एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। यह कार्रवाई पत्रकार की हत्या के 33 दिन बाद पुलिस द्वारा मामले का खुलासा करने और मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद हुई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी, और अब शूटरों के मारे जाने से इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि 8 मार्च 2025 को सीतापुर के महोली तहसील में दैनिक जागरण के संवाददाता राघवेंद्र बाजपेयी की लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हेमपुर ओवरब्रिज के पास दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दो बाइक सवार हमलावरों ने राघवेंद्र की बाइक को टक्कर मारकर उन्हें रोका और फिर चार गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी। राघवेंद्र के सिर, सीने, और पीठ पर गोलियां लगी थीं, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार, राघवेंद्र को एक फोन कॉल के बाद घर से बुलाया गया था। उनकी हत्या के पीछे की वजह उनके द्वारा कारदेव मंदिर के पुजारी शिवानंद उर्फ विकास राठौर के कुकर्मों को देख लेना था। राघवेंद्र ने पुजारी को एक नाबालिग के साथ कुकर्म करते देखा था, जिसके डर से पुजारी ने उनकी हत्या की सुपारी दी थी।
पुलिस का खुलासा और गिरफ्तारियां 33 दिन बाद, 10 अप्रैल 2025 को, सीतापुर पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता पुजारी शिवानंद बाबा और उसके दो सहयोगियों, निर्मल सिंह और असलम गाजी, को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि पुजारी ने अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए राघवेंद्र की हत्या की साजिश रची थी। उसने निर्मल सिंह और असलम गाजी को 4 लाख रुपये में दो शूटरों को हायर करने का काम सौंपा था, जिन्हें 3 लाख रुपये दिए गए।
पुलिस ने 1,000 से अधिक मोबाइल नंबरों की जांच की, 250 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले, और 125 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की। सीसीटीवी फुटेज में दो बाइक सवार शूटर और उनके पीछे एक काली थार नजर आई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया।
मुठभेड़ में शूटर ढेरहाल की जानकारी के अनुसार, पुलिस और STF की संयुक्त टीम ने दोनों फरार शूटरों को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। यह मुठभेड़ सीतापुर के आसपास के क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस को शूटरों के छिपे होने की सूचना मिली थी। STF और क्राइम ब्रांच की सात टीमें इन शूटरों की तलाश में लगी थीं। मुठभेड़ के दौरान शूटरों ने पुलिस पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस और STF ने कार्रवाई की, और दोनों शूटर मारे गए।पुलिस ने अभी तक शूटरों की पहचान और मुठभेड़ की सटीक तारीख का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह कार्रवाई हाल के दिनों में हुई है। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मौके से हथियार और अन्य सबूत बरामद किए हैं, जिनकी जांच जारी है।
परिवार और जनता का आक्रोश
राघवेंद्र की हत्या के बाद उनके परिवार और स्थानीय पत्रकारों में भारी आक्रोश था। परिवार ने 2 करोड़ रुपये के मुआवजे, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। उन्होंने डीएम और एसपी के आने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।
घटना ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “जंगलराज” करार दिया था।