
चेन्नई/ मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि लिव-इन में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना अदालत की जिम्मेदारी है, क्योंकि ऐसे रिश्तों में उन्हें विवाह जैसी कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाती। साथ ही, शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाना अपराध है।
जस्टिस एस. श्रीमथी ने एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मामले में आरोपी पर आरोप था कि उसने एक महिला से शादी का झूठा वादा करके कई बार शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में वादा तोड़ दिया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (धोखे से यौन संबंध बनाने का प्रावधान) लागू करने का निर्देश दिया और कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय समाज के लिए “सांस्कृतिक झटका” (cultural shock) है, लेकिन यह तेजी से बढ़ रहा है। महिलाएं आधुनिक बनने की कोशिश में ऐसे रिश्ते चुनती हैं, लेकिन रिश्ता टूटने पर उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती।
महिलाओं को संरक्षण देने के लिए लिव-इन को प्राचीन ‘गंधर्व विवाह’ या प्रेम विवाह के रूप में देखा जाना चाहिए और उन्हें पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। इससे रिश्ते में उतार-चढ़ाव आने पर भी उन्हें पत्नी के अधिकार मिल सकेंगे।
पुरुष आधुनिकता के नाम पर रिश्ते बनाते हैं, लेकिन टूटने पर महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में अदालतों की जिम्मेदारी है कि कमजोर महिलाओं की रक्षा करें।
लिव-इन में महिलाएं मानसिक पीड़ा झेल रही हैं और शोषण का शिकार हो रही हैं। नाबालिगों को POCSO से सुरक्षा मिलती है, विवाहित महिलाओं को कानूनी उपाय हैं, लेकिन लिव-इन वाली महिलाओं के पास विशेष सुरक्षा नहीं है।
अदालत ने कहा कि अगर पुरुष शादी का वादा करके संबंध बनाता है और बाद में मुकर जाता है, तो यह धोखा है और धारा 69 के तहत अपराध है। आरोपी को पुलिस द्वारा हिरासत में पूछताछ जरूरी है।यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे झूठे वादों पर आधारित शोषण के मामलों में सख्ती बढ़ेगी। मामला तिरुचिरापल्ली जिले की मनप्पराई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में दर्ज है।