March 13, 2026

नई दिल्ली, 14 दिसंबर 2025। भारत में श्रम कानूनों के इतिहास में एक बड़ा बदलाव आया है। केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 से चार नई श्रम संहिताओं को पूरे देश में लागू कर दिया है। इन संहिताओं ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर एक सरल और आधुनिक ढांचा तैयार किया है। इनमें से व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता (OSH कोड) ने काम के घंटों में महत्वपूर्ण लचीलापन दिया है, जिससे कर्मचारियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिलने की उम्मीद है।

क्या है नया प्रावधान?
श्रम मंत्रालय के अनुसार, अब कंपनियां कर्मचारियों की सहमति से दैनिक कार्य घंटों को 12 घंटे तक बढ़ा सकती हैं, लेकिन साप्ताहिक कुल घंटे 48 से अधिक नहीं होंगे। इसका सीधा मतलब है कि चार दिन 12 घंटे की शिफ्ट के साथ काम करके कर्मचारी बाकी तीन दिन पेड हॉलिडे (वेतन सहित छुट्टी) ले सकते हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 12 घंटे की शिफ्ट में ब्रेक और विश्राम का समय शामिल होगा। यदि दैनिक सीमा से अधिक काम होता है, तो ओवरटाइम पर दोगुना वेतन देना अनिवार्य है। यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि एक विकल्प है जो नियोक्ता और कर्मचारी की सहमति से लागू होगा। पुराने नियमों में दैनिक घंटे आमतौर पर 8-9 तक सीमित थे, लेकिन अब यह लचीलापन उत्पादकता और कर्मचारी संतुष्टि बढ़ाने के लिए दिया गया है।

कर्मचारियों के लिए फायदे –यह बदलाव कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हो सकता है। लंबे वीकेंड से परिवार के साथ समय बिताना, व्यक्तिगत कार्य निपटाना और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में साबित हुआ है कि कम कार्य दिवसों वाला मॉडल तनाव कम करता है और कार्य क्षमता बढ़ाता है। साथ ही, महिलाओं को रात्रि शिफ्ट की अनुमति (सुरक्षा उपायों के साथ) मिलने से समान अवसर बढ़ेंगे। ओवरटाइम पर दोगुना वेतन से अतिरिक्त कमाई का मौका भी मिलेगा।

नियोक्ताओं को लाभ-कंपनियों के लिए यह परिचालन को कुशल बनाएगा। आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में शिफ्ट व्यवस्था आसान होगी, जिससे उत्पादन निरंतर रहेगा। छोटी इकाइयों के लिए नियम सरल हुए हैं, जो रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 12 घंटे की लंबी शिफ्ट शारीरिक थकान पैदा कर सकती है, इसलिए संहिता में सुरक्षा मानक और स्वास्थ्य जांच के प्रावधान सख्त रखे गए हैं।

श्रम मंत्री ने कहा, “ये संहिताएं कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के हित में हैं। पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर हम आधुनिक भारत की नींव रख रहे हैं।” अब देखना यह है कि कंपनियां इस लचीलेपन को कितनी जल्दी अपनाती हैं। कई सेक्टरों में पायलट आधार पर 4-दिन कार्य सप्ताह शुरू होने की खबरें आ रही हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से लाखों कर्मचारियों की कार्य संस्कृति को नया आयाम देगा।

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