श्रीनगर, 15 अगस्त। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को श्रीनगर में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इस समझौते की वजह से लंबे समय तक अपने जल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पाकिस्तान के साथ 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित रखने का फैसला जारी रहना चाहिए।
अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उस टिप्पणी पर भी कड़ा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान की ‘रेड लाइन’ बताते हुए भारत को चेतावनी दी थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान एक तरफ कश्मीरियों का हितैषी होने का दावा करता है, लेकिन जब जम्मू-कश्मीर के अपने जल संसाधनों की बात आती है तो उसका रवैया बदल जाता है।
‘हमारा खून चूसा गया’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने सिंधु जल समझौते का खामियाजा भुगता है। उन्होंने कहा, “हमारा खून चूसा गया है। ये हमारा पानी है और इस पर हमारा पहला हक है।” उमर ने सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान वास्तव में कश्मीरियों का इतना बड़ा हितैषी है तो वह जम्मू-कश्मीर को अपने ही नदी जल का इस्तेमाल करने से क्यों रोकना चाहता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से कश्मीरियों के हितों की बात करना और दूसरी ओर उनके जल संसाधनों पर दावा करना विरोधाभासी है। उनके मुताबिक, सिंधु जल समझौते के कारण जम्मू-कश्मीर को अपनी नदियों की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल करने में लंबे समय तक बाधाओं का सामना करना पड़ा।
समझौते को लेकर पहले भी उठा चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल समझौते को जम्मू-कश्मीर के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है। इससे पहले भी वह कह चुके हैं कि इस समझौते ने जम्मू-कश्मीर को नुकसान पहुंचाया और अब इसके निलंबन के बाद क्षेत्र को अपने जल संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने विशेष रूप से बिजली उत्पादन, सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की संभावनाओं का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि नदियों के पानी का बेहतर इस्तेमाल होने से जम्मू-कश्मीर में जल और ऊर्जा से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
भारत ने 2025 में किया था समझौता निलंबित
भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को निलंबित करने की घोषणा की थी। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर तनाव और बढ़ गया। पाकिस्तान लगातार इस कदम का विरोध करता रहा है और भारत से समझौते को बहाल करने की मांग करता रहा है।
अब शहबाज शरीफ की ओर से पानी को ‘रेड लाइन’ बताए जाने के बाद उमर अब्दुल्ला का बयान इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह समझौते को फिर से लागू किए जाने के पक्ष में नहीं हैं और इसे निलंबित रखने को जम्मू-कश्मीर के हित में मानते हैं।
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कश्मीरी पंडितों को मिल रही कथित आतंकी धमकियों समेत जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे समय में जब घाटी में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, मुख्यमंत्री का पाकिस्तान और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान से साफ है कि सिंधु जल समझौता अब केवल भारत-पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में जल संसाधनों, बिजली उत्पादन और क्षेत्रीय हितों से भी सीधे जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।


