गुवाहाटी। असम की राजधानी गुवाहाटी में हाल ही में नीट परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में आयोजित छात्र प्रदर्शन उस समय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया, जब इस आंदोलन में असम सरकार के वरिष्ठ मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के नेता केशव महंत की बेटी दिबीसा महंत भी शामिल होती दिखाई दीं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
इस दौरान दिबीसा महंत भी प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद रहीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ लगाए जा रहे नारों में शामिल दिखाई दे रही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
दिबीसा महंत की मौजूदगी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनके पिता केशव महंत असम सरकार में मंत्री हैं और उनकी पार्टी एजीपी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सहयोगी है। ऐसे में सत्ता पक्ष के एक वरिष्ठ सहयोगी दल के मंत्री की बेटी का इस तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में केशव महंत की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, भाजपा और एजीपी की ओर से भी इस घटनाक्रम पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को छात्र आंदोलन के प्रति बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में व्यापक असंतोष है।
वहीं, भाजपा का कहना है कि नीट परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और केंद्र सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति के निजी विचारों को सरकार या गठबंधन दलों की आधिकारिक राय नहीं माना जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि एजीपी और भाजपा इस घटनाक्रम पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।


