नई दिल्ली। दृढ़ संकल्प, नवाचार और किसानों की समस्या का समाधान खोजने की सोच किसी भी छोटे प्रयास को बड़ी सफलता में बदल सकती है। इसका उदाहरण रांची की उद्यमी रितु पाठक हैं, जिन्होंने सह-संस्थापक बिनोद सिंह के साथ वर्ष 2013 में मात्र 6 लाख रुपये की बचत से 'एचएम हर्बल्स' (HM Herbals) की शुरुआत की। आज यह स्टार्टअप 2.2 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाला सफल उद्यम बन चुका है और देशभर के 650 से अधिक किसानों एवं छोटे उद्यमियों को आधुनिक डिस्टिलेशन तकनीक उपलब्ध करा रहा है।
रितु पाठक ने बताया कि एरोमैटिक फसलों की खेती के दौरान उन्हें बाजार में उपलब्ध डिस्टिलेशन मशीनों की कई कमियां देखने को मिलीं। पारंपरिक मशीनें जल्दी खराब हो जाती थीं, ईंधन की खपत अधिक करती थीं और आवश्यक तेल (Essential Oil) का उत्पादन भी कम तथा गुणवत्ता में कमजोर होता था। इससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।
इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए रितु पाठक और बिनोद सिंह ने स्वयं बेहतर तकनीक वाली डिस्टिलेशन मशीन विकसित करने का निर्णय लिया। जड़ी-बूटियों, पत्तियों, जड़ों और फूलों के प्रसंस्करण की गहरी समझ के आधार पर उन्होंने अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल डिस्टिलेशन यूनिट तैयार की।
कंपनी ने अपनी पहली 2,000 लीटर क्षमता वाली हाइड्रो डिस्टिलेशन यूनिट एक किसान को 1.5 लाख रुपये में बेची। मशीन की बेहतर गुणवत्ता, कम ईंधन खपत और अधिक तेल उत्पादन की क्षमता के कारण किसानों का भरोसा तेजी से बढ़ा और कंपनी को लगातार नए ऑर्डर मिलने लगे।
आज एचएम हर्बल्स सटीक एवं पर्यावरण-अनुकूल डिस्टिलेशन मशीनों का निर्माण कर रही है। इन मशीनों की मदद से देश के 650 से अधिक किसान और छोटे उद्यमी अपनी उत्पादकता बढ़ाने के साथ बेहतर गुणवत्ता का आवश्यक तेल तैयार कर रहे हैं।
कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने कारोबार का विस्तार करते हुए 10 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का आंकड़ा पार करना है। रितु पाठक का मानना है कि यदि किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर तकनीक आधारित समाधान विकसित किए जाएं, तो कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
रितु पाठक की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीमित पूंजी, सही सोच और नवाचार के दम पर भी एक ऐसा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है, जो न केवल आर्थिक रूप से सफल हो बल्कि किसानों की आय और कृषि आधारित उद्योगों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे।

