नई दिल्ली, 13 अगस्त। कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। तमिलनाडु की ओर से कर्नाटक से कावेरी नदी का पानी निर्धारित मात्रा में छोड़े जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी। हालांकि, अदालत ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई 17 अगस्त 2026 तक टाल दी।
तमिलनाडु ने पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग की
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों का पालन करने और राज्य के हिस्से का पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। विवाद का केंद्र कावेरी नदी के पानी का बंटवारा है, जिसे लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक विवाद चला आ रहा है।
हालिया विवाद में कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए रोजाना पानी छोड़ने के निर्देश को लेकर मतभेद सामने आए हैं। तमिलनाडु का कहना है कि कर्नाटक को प्राधिकरण के आदेशों का पालन करना चाहिए, जबकि कर्नाटक ने पानी की उपलब्धता और अपने राज्य की जरूरतों का हवाला देते हुए निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने पर आपत्ति जताई है।
कर्नाटक ने जताई पानी छोड़ने में कठिनाई
कर्नाटक सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तमिलनाडु को रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ना उसके लिए कठिन है। राज्य सरकार ने पानी की उपलब्धता और अपने किसानों एवं पेयजल जरूरतों को लेकर चिंता जताई है। कर्नाटक की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि वह इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी आपत्तियां रखेगा।
कावेरी विवाद फिर राजनीतिक मुद्दा बना
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के साथ ही कर्नाटक में भी कावेरी जल विवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कुछ कन्नड़ संगठनों ने कावेरी जल छोड़ने के विरोध में बंद का आह्वान किया है, हालांकि कई संगठनों ने इससे दूरी बना ली है।
कावेरी जल विवाद दोनों राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है। पानी की उपलब्धता, सिंचाई और किसानों की जरूरतों को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु लंबे समय से आमने-सामने रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर दोनों राज्यों की नजर रहेगी।
राज्यों की कराधान शक्तियों का मामला अलग
इस बीच राज्यों की कराधान शक्तियों से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है। हालांकि, इसे 13 अगस्त की कावेरी सुनवाई के साथ जोड़ना सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संविधान पीठ 22 सितंबर 2026 से इस सवाल पर सुनवाई शुरू करने वाली है कि क्या राज्य सरकारों को अतिरिक्त बिक्री कर लगाने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त है।
इस तरह आज सुप्रीम कोर्ट की गतिविधियों में कावेरी जल विवाद प्रमुख मुद्दों में रहा, जबकि राज्यों की कराधान शक्तियों से जुड़ी बड़ी संवैधानिक सुनवाई अगले महीने प्रस्तावित है। अब कावेरी मामले में 17 अगस्त की सुनवाई पर यह तय होगा कि तमिलनाडु की मांग और कर्नाटक की आपत्तियों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।


