March 13, 2026

नई दिल्ली,16 नवंबर। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने आत्ममंथन की बजाय एक बार फिर ‘वोट चोर’ का राग अलापना शुरू कर दिया है। 14 नवंबर को आए नतीजों में एनडीए ने 200 के करीब सीटें जीतकर बाजी मारी, जबकि महागठबंधन (कांग्रेस-राजद) 35-40 सीटों पर सिमट गया। 61 सीटों पर लड़ी कांग्रेस को सिर्फ 4-6 सीटें मिलीं, जो 2010 के बाद उसका सबसे खराब प्रदर्शन है। वोट शेयर भी महज 8.71% रहा, जबकि राजद को 23% और बीजेपी को 20% वोट मिले।

‘वोट चोरी’ का आरोप, सबूत का वादा
15 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और अजय माकन की मौजूदगी में हाई-लेवल मीटिंग हुई। बैठक के बाद वेणुगोपाल ने दावा किया, “बिहार में बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई। पीएम मोदी, अमित शाह और चुनाव आयोग ने साजिश रची।” इस नेरेटिव को आगे कर कांग्रेस ने अपने प्रवक्ताओं को आगे किया है।
कांग्रेस ने दो हफ्ते में आंकड़ों के साथ ‘सबूत’ पेश करने की बात कही। कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने भी समर्थन करते हुए कहा, “वोट चोरी की जांच हो।” जयराम रमेश ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को ‘वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश’ करार दिया।

पुराना नैरेटिव, नया ट्विस्ट
कांग्रेस का यह ‘वोट चोर’ अभियान नया नहीं। प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने 70-80% रैलियों में SIR और वोट चोरी पर फोकस किया। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी चलाई गई, लेकिन यह बुरी तरह फ्लॉप रही। जिन जिलों में यात्रा हुई, वहां भी कांग्रेस को करारी हार मिली। विश्लेषकों का कहना है कि बेरोजगारी, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे बिहार के असल मुद्दों पर फोकस न करना पार्टी को भारी पड़ा। एक कांग्रेसी नेता ने स्वीकारा, “हमारी ऊर्जा गलत जगह खर्च हुई।

“वोटिंग के आंकड़े बता रहे दूसरी कहानी
चुनाव आयोग के मुताबिक, कई जिलों में 70% से ज्यादा वोटिंग हुई—यह रिकॉर्ड स्तर है। इससे ‘वोट चोरी’ का दावा कमजोर पड़ रहा है। राजद को बीजेपी से 15 लाख ज्यादा वोट मिले, लेकिन सीट शेयरिंग और प्रचार में तालमेल की कमी ने महागठबंधन को डुबो दिया।X पर जनता का मूड
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #VoteChor ट्रेंड तो कर रहा है, लेकिन ज्यादातर पोस्ट कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं। यूजर्स लिख रहे हैं, “वोट चोर का नारा फेल, बिहार ने SIR को ठुकराया।” कुछ ने राहुल गांधी को ‘पनौती’ तक कहा।

क्या है आगे की राह?
कांग्रेस ने वादा किया है कि आंकड़ों की पड़ताल के बाद सबूत लाएंगे, लेकिन जानकारों का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण के यह नैरेटिव पहले भी (महाराष्ट्र 2019, हरियाणा 2019) फ्लॉप हो चुका है। राहुल गांधी ने ‘गहन समीक्षा’ की बात कही, लेकिन अगर पार्टी ‘वोट चोर’ के भरोसे रही, तो मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे आगामी चुनावों में और नुकसान हो सकता है। बिहार का संदेश साफ है—वोटर अब नारों नहीं, नतीजों पर वोट देते हैं।

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