वाशिंगटन, 4 जनवरी 2026 । नए साल की शुरुआत में ही दुनिया एक बड़े संकट में घिर गई है। अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले गया।
इस ऑपरेशन का कोडनेम ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ था, जिसमें 150 से ज्यादा अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने काराकास और उत्तरी वेनेजुएला के कई ठिकानों पर बमबारी की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘अमेरिकी सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन’ बताया और कहा कि मादुरो को ड्रग तस्करी और आतंकवाद के आरोपों में न्यूयॉर्क में मुकदमा चलाया जाएगा।ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला को ‘चलाएगा’ जब तक लोकतांत्रिक संक्रमण नहीं हो जाता।
उन्होंने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी कंपनियों की मजबूत भूमिका की भी बात की। यह हमला महीनों की तैयारी का नतीजा था, जिसमें कैरिबियन सागर में अमेरिकी नौसेना की तैनाती और ड्रग तस्करी से जुड़े जहाजों पर हमले शामिल थे।

दुनिया की प्रतिक्रियाएं
दो धड़े साफइस अमेरिकी कार्रवाई ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ मादुरो के सहयोगी देशों ने इसे ‘साम्राज्यवादी हमला’ और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, तो दूसरी तरफ कुछ देशों और वेनेजुएला के विपक्षी समर्थकों ने इसे स्वागत किया।
निंदा करने वाले देश (मुख्य रूप से बाएं झुकाव वाले या अमेरिका विरोधी)- रूस: विदेश मंत्रालय ने इसे ‘सशस्त्र आक्रमण’ कहा और गहरी चिंता जताई। राष्ट्रपति पुतिन के करीबी इसे ‘खतरा’ बता रहे हैं।
चीन: ‘गहरी सदमा’ व्यक्त किया और अमेरिका की ‘दादागिरी’ तथा संप्रभु देश पर बल प्रयोग की कड़ी निंदा की।
ईरान: इसे ‘राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन’ बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग की।
मेक्सिको, ब्राजील, कोलंबिया (वामपंथी सरकारें): क्षेत्रीय अस्थिरता की चेतावनी दी और एकतरफा सैन्य कार्रवाई की निंदा की।
क्यूबा, बेलारूस: ‘अपराधी हमला’ कहा और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। फ्रांस और यूरोपीय संघ के कुछ हिस्से: अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, हालांकि कुछ ने मादुरो शासन की आलोचना भी की। ये देश इसे ‘खुली जंग की शुरुआत’ या ‘नया वियतनाम’ बता रहे हैं, और चेतावनी दे रहे हैं कि इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ेगी।
समर्थन या सकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाले:वेनेजुएला के विपक्षी नेता एडमुंडो गोंजालेज और प्रवासी वेनेजुएलियाई समुदायों ने जश्न मनाया। चिली और अन्य जगहों पर सड़कों पर उत्सव हुए। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने लोकतांत्रिक संक्रमण का समर्थन किया, हालांकि सैन्य हस्तक्षेप का विरोध जताया। कुछ दक्षिणपंथी लैटिन अमेरिकी नेता और ट्रंप समर्थक इसे ‘तानाशाह के अंत’ के रूप में देख रहे हैं। अमेरिकी रिपब्लिकन नेताओं ने इसे कानूनी और जरूरी बताया।
भारत की प्रतिक्रिया: भारत ने ‘गहरी चिंता’ जताई है और दोनों पक्षों से संवाद व कूटनीति अपनाने की अपील की। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा टालने की सलाह दी।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे ‘जंगल का कानून’ बताया, जहां ‘ताकतवर की चलती है’।आगे क्या?संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 5 जनवरी को बैठक करने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के Article 2(4) का उल्लंघन हो सकती है, जो संप्रभु देशों पर बल प्रयोग रोकता है।
हालांकि अमेरिका इसे ‘आत्मरक्षा’ और ‘ड्रग आतंकवाद’ के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है।वेनेजुएला में इमरजेंसी लगी हुई है, और कुछ इलाकों में बिजली गुल है। नागरिक मौतों की खबरें भी आ रही हैं। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, क्योंकि वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में है।यह घटना 2026 की वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे सकती है।