
मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय के बीच
जयपुर 10 नवंबर 2025: राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर कल (11 नवंबर) उपचुनाव के लिए मतदान होगा। कुल 2,27,563 मतदाता अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें 1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिलाएं और 4 अन्य शामिल हैं। मतगणना 14 नवंबर को होगी। यह उपचुनाव पूर्व बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द होने के बाद हो रहा है, जिनकी 2005 के उप सरपंच चुनाव में धांधली के आरोप में हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया था।
निर्वाचन आयोग ने 7 अक्टूबर को तारीखों का ऐलान किया था, जिसके साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय के बीच है। वोटिंग सुबह 7 से शाम 6 बजे तक चलेगी।उपचुनाव का पृष्ठभूमि और कारणअंता विधानसभा सीट बारां जिले में आती है, जो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ मानी जाती है। 2023 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कंवरलाल मीणा ने यहां जीत हासिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीट खाली हो गई। यह उपचुनाव राजस्थान सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, क्योंकि बीजेपी बहुमत के करीब पहुंचना चाहती है। कांग्रेस इसे अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मान रही है। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
प्रमुख उम्मीदवार और राजनीतिक समीकरणकुल 15 उम्मीदवारों में से मुख्य तीन पर सबकी नजरें हैं। बीजेपी ने वसुंधरा राजे के करीबी मोरपाल सुमन को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया को मैदान में उतारा। निर्दलीय नरेश मीणा मीणा समुदाय के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं। अन्य उम्मीदवारों में पुखराज सोनल, पंकज कुमार, बिलाल खान, मंजूर आलम, योगेश कुमार शर्मा (राइट टू रिकॉल पार्टी) आदि शामिल हैं।
11 अन्य दस्तावेज मान्य
मतदान के लिए वोटर आईडी के अलावा 11 अन्य दस्तावेज मान्य हैं, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि। जिला निर्वाचन अधिकारी रोहिताश्व सिंह तोमर ने सभी तैयारियां पूरी होने की पुष्टि की। कुल 227 बूथ बनाए गए हैं, जिसमें 80 संवेदनशील हैं।
वोटिंग प्रतिशत 70-75% रह सकता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोटिंग प्रतिशत 70-75% रह सकता है। मौसम साफ रहने की उम्मीद है। निर्दलीय उम्मीदवार वोट स्प्लिट कर सकते हैं।
परिणाम 14 नवंबर को सुबह 8 बजे से शुरू होंगे।यह उपचुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों (जैसे सिंचाई, बेरोजगारी) पर केंद्रित है, बल्कि राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।