February 1, 2026

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी तस्वीर बदल दी। 243 सीटों में एनडीए (बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी-आरवी, एचएएम, आरएलएम) ने 202 सीटें झटककर इतिहास रच दिया, जबकि महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल) महज 35 सीटों पर सिमट गया। सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने 5 सीटें जीतकर मुस्लिम वोट बांटे, जिससे आरजेडी का ‘एमवाई’ (मुस्लिम-यादव) गढ़ ध्वस्त हो गया।

एनडीए की प्रचंड जीत-एनडीए ने 55% से ज्यादा वोट शेयर के साथ 2010 का रिकॉर्ड तोड़ा। बीजेपी ने 89-92, जेडीयू ने 83-85, एलजेपी-आरवी ने 19, एचएएम ने 5 और आरएलएम ने 4 सीटें जीतीं। नीतीश कुमार की महिला कल्याण योजनाओं (लाड़ली बहना, 10 हजार रुपये सहायता) और विकास मॉडल (सड़क, बिजली) ने ग्रामीण बिहार को रिझाया। बीजेपी का हिंदू ध्रुवीकरण, मोदी-शाह की रणनीति और छोटे सहयोगियों (चिराग, मांझी, कुशवाहा) की जातिगत पकड़ ने जीत को अभूतपूर्व बनाया। चुनाव आयोग के ‘SIR’ अभियान ने 65 लाख फर्जी वोटर हटाए, जिसे एनडीए ने पारदर्शिता का हथियार बनाया। पीएम मोदी ने इसे ‘गंगा का बहाव’ करार दिया, जो बंगाल तक जाएगा।

महागठबंधन का पतन-महागठबंधन को करारी शिकस्त मिली। आरजेडी 25, कांग्रेस 5-6, सीपीआई-एमएल 2, सीपीआई-एम 1 और आईआईपी 1 सीट पर सिमटी। 2020 की 110 सीटों से 35 पर गिरावट ने तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल उठाए। मुस्लिम नेतृत्व को नजरअंदाज करना और मुकेश साहनी पर दांव भारी पड़ा। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खाता भी नहीं खुला।

ओवैसी का धमाल-एआईएमआईएम ने सीमांचल में धमाल मचाया। जोकीहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी में जीत के साथ 2-3% वोट शेयर हासिल किया। ओवैसी ने महागठबंधन पर मुसलमानों को ‘वोट बैंक’ बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “6 सीटें मांगी थीं, नहीं दीं। पांडवों को 5 गांव दे देते तो महाभारत न होती।” ओवैसी ने यूपी-2027 पर नजरें टिकाईं, जबकि विपक्ष ने उन्हें ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया।
सीमांचल में सफाया-सीमांचल (40%+ मुस्लिम आबादी) में महागठबंधन का किला ढह गया। 2020 की 20 सीटों से 2025 में सिर्फ 9 बचीं। एनडीए ने 18, एआईएमआईएम ने 5 और कांग्रेस ने 1 सीट (पप्पू यादव) जीती। आरजेडी को 1-2 सीटें ही मिलीं। ओवैसी ने मुस्लिम वोटों को ‘हक की सियासत’ का नारा देकर खींचा, जबकि एनडीए ने बाढ़, बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दों पर पकड़ बनाई। योगी आदित्यनाथ की सिवान रैली ने हिंदू वोटों को और मजबूत किया।

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • एनडीए: 202 सीटें, 55%+ वोट शेयर।
  • महागठबंधन: 35 सीटें, 30%- वोट शेयर।
  • एआईएमआईएम: 5 सीटें, 2-3% वोट शेयर।
  • महिला मतदान: 65%+, पुरुषों से ज्यादा।
  • सीमांचल: एनडीए 18, एआईएमआईएम 5, महागठबंधन 9।

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