
पटना /खगड़िया, 1 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में खगड़िया सदर (संख्या 149) सीट एक बार फिर जातीय समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और राष्ट्रीय दलों के गठबंधनों की रणनीति का केंद्र बनेगी। राम विलास पासवान के गृह जिले खगड़िया में NDA (BJP-JD(U)-LJP) और महागठबंधन (RJD-Congress) के बीच कड़ा मुकाबला होने की पूरी संभावना है।
जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) ने यहां से बाबलू मंडल को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि वे अपने मौजूदा विधायक छत्रपति यादव को दोबारा उतारेंगे। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट में 1.5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल होने से यह सीट और भी रोचक हो गई है। मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा, जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
सीट का प्रोफाइल:
जाति और विकास का मिश्रणखगड़िया सदर बिहार के उत्तरी भाग में स्थित एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है, जो खगड़िया जिले का हिस्सा है। यहां की जनसंख्या करीब 3.5 लाख है, जिसमें यादव (लगभग 25-30%), कोइरी/कुरमी (20%), मुस्लिम (15%), दलित (10%) और अन्य पिछड़ी जातियां प्रमुख हैं। गंगा नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र में बाढ़, कृषि संकट, बेरोजगारी और प्रवासन प्रमुख मुद्दे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में LJP(RV) के राजेश वर्मा ने खगड़िया सीट पर भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, जो NDA की मजबूती को दर्शाता है। लेकिन विधानसभा स्तर पर मुकाबला हमेशा त्रिकोणीय रहता है, जहां RJD की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) भी त्रिकोणीय संघर्ष बना सकती है, जो युवा मतदाताओं और प्रवासन के मुद्दे पर फोकस कर रही है। SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में 20% की वृद्धि हुई है, जिससे युवा और महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। कुल मतदाता: लगभग 2.6 लाख (2020 में 58% मतदान)।
प्रमुख उम्मीदवार और गठबंधन की रणनीति
NDA ने सीट शेयरिंग में JD(U) को खगड़िया सदर सौंपी है। महागठबंधन में कांग्रेस का दावा मजबूत है, जबकि RJD समर्थित निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हो सकते हैं।
| दल/गठबंधन | उम्मीदवार | पृष्ठभूमि | मजबूती |
|---|---|---|---|
| JD(U) (NDA) | बाबलू मंडल | पूर्व JDU नेता, राम विलास पासवान के जिले से। स्थानीय स्तर पर सक्रिय, दलित-यादव समर्थन। | NDA की एकजुटता और नीतीश कुमार की विकास योजनाओं (जैसे रोजगार गारंटी) पर निर्भर। |
| कांग्रेस (महागठबंधन) | छत्रपति यादव | 2020 में विजयी, यादव समुदाय से। RJD समर्थन संभावित। | पिछली जीत (2020 में 51,000+ वोट), बेरोजगारी और बाढ़ पर आक्रामक प्रचार। |
| RJD (महागठबंधन) | संभावित: मनोज यादव या निर्दलीय | यादव-मुस्लिम गठजोड़ पर फोकस। | तेजस्वी यादव की रैली से मजबूती, लेकिन सीट शेयरिंग में कांग्रेस से टकराव। |
| JSP (स्वतंत्र) | संभावित: स्थानीय युवा नेता | प्रशांत किशोर की यात्रा का प्रभाव। | युवा वोट (30% से अधिक), प्रवासन मुद्दे पर अपील। |
JD(U) की रणनीति पासवान परिवार के प्रभाव को भुनाने की है, जबकि महागठबंधन बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर हमला बोलेगा। हाल ही में JDU के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह (पड़ोस की परबत्ता सीट से) ने RJD जॉइन कर लिया, जो खगड़िया में NDA को झटका दे सकता है।पिछले चुनावों का आंकड़ा: उतार-चढ़ाव वाली सीटखगड़िया सदर हमेशा से ही NDA और महागठबंधन के बीच बंटी रही है। यहां 2015 में JDU की पूनम देवी यादव ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2020 में कांग्रेस के छत्रपति यादव ने बाजी मार ली।
| वर्ष | विजेता | दल | वोट शेयर | हार का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2015 | पूनम देवी यादव | JD(U) | 46.43% (64,767 वोट) | 25,565 वोट |
| 2020 | छत्रपति यादव | INC | 33.5% (51,000+ वोट) | 8,000 वोट (RJD के खिलाफ) |
2020 में कुल 1,51,305 वोट पड़े थे, जिसमें महिला मतदाताओं की भागीदारी 60% से अधिक रही। NDA की 2020 में हार मुख्य रूप से जातीय विभाजन से हुई, लेकिन 2024 लोकसभा जीत ने उन्हें मजबूती दी है।प्रमुख मुद्दे: बाढ़, बेरोजगारी और जाति का खेल
- बाढ़ और कृषि: गंगा की बाढ़ से हर साल फसलें बर्बाद होती हैं। उम्मीदवारों ने बांध निर्माण और राहत पैकेज का वादा किया है।
- बेरोजगारी और प्रवासन: 40% युवा बाहर नौकरी के लिए जाते हैं। NDA ने 1 करोड़ नौकरियां देने का घोषणापत्र जारी किया, जबकि महागठबंधन ने ‘रोजगार यात्रा’ का ऐलान किया।
- जातीय समीकरण: यादव-मुस्लिम (MY) गठजोड़ RJD के पक्ष में, जबकि EBC-दलित NDA का आधार। JSP युवा OBC को ललचाएगी।
- महिला वोट: 48% महिला मतदाता, जो पोषण और सुरक्षा योजनाओं पर फोकस करेंगी।
- ओपिनियन पोल्स के अनुसार, NDA को 52% समर्थन (मुद्रा सर्वे), लेकिन महागठबंधन 48% से पीछे नहीं। JSP 5-7% वोट काट सकती है।
चुनावी माहौल: उत्साह चरम परखगड़िया में प्रचार युद्ध तेज है। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की रैलियां हो चुकी हैं, जबकि चिराग पासवान स्थानीय सभाओं में सक्रिय हैं। SIR से वोटर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन वोटर लिस्ट विवाद (2003 से पुरानी लिस्ट) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। स्थानीय लोग कहते हैं, “यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, भविष्य का है।”यह सीट बिहार की दिशा तय करेगी, जहां NDA की एकजुटता और महागठबंधन की आक्रामकता आमने-सामने हैं। परिणाम 14 नवंबर को आएंगे, जो पूरे राज्य के समीकरण बदल सकते हैं।