
ओलंपिक-2025 में दिखी नई उम्मीद
जगदलपुर, 13 दिसंबर। कभी वामपंथी उग्रवाद की हिंसा, हत्याओं और आईईडी विस्फोटों से सुर्खियों में रहने वाला बस्तर आज बदलाव की मिसाल पेश कर रहा है। बस्तर ओलंपिक-2025 इस बदलाव का जीता-जागता प्रमाण है, जहां हथियार त्याग चुके सैकड़ों पुनर्वासित युवा खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
इस वर्ष बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय फाइनल में ‘नुआ बाट’ (नया रास्ता) टीम के रूप में 761 से अधिक आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने हिस्सा लिया। ये युवा अब बंदूक की जगह हॉकी स्टिक, तीर-कमान और रस्सी थामे मैदान में उतरे हैं। कुल 3,500 से ज्यादा खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में भाग लिया, जिसमें बस्तर संभाग के सात जिलों के प्रतिभागी शामिल थे।
एक पूर्व नक्सली खिलाड़ी ने कहा, “20 साल जंगलों में बंदूक थामे घूमता रहा, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद हॉकी स्टिक और बैडमिंटन रैकेट हाथ में है। अब जीवन में नई खुशी है।”आत्मसमर्पित युवा पोड़ियाम, जो कभी दुर्दांत नक्सली हिड़मा के साथ था, अब तीरंदाजी में अपना लोहा मनवा रहा है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्घाटन करते हुए कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम है। समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 700 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं की भागीदारी को सराहा और कहा, “ये युवा अब विकास और एकता का प्रतीक बन रहे हैं।”

इस आयोजन में नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए पीड़ित भी शामिल हुए, जो शांति और समरसता का संदेश दे रहे हैं। बस्तर के युवा अब हिंसा की जगह खेल और विकास की राह पर चल पड़े हैं। यह बदलाव न केवल बस्तर, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। बस्तर की नई तस्वीर वाकई आनंद से भर देने वाली है!