
नई दिल्ली/कोलकाता ।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ वाली सूची को सार्वजनिक करने का बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने बुधवार शाम को नोटिफिकेशन जारी कर घोषणा की कि यह लिस्ट आगामी शनिवार, 24 जनवरी तक सभी संबंधित स्थानों पर पब्लिक कर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी में आए करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक/प्रखंड कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं।
कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस भेजना आम जनता पर अनावश्यक तनाव डाल रहा है, इसलिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।किन मामलों में नाम लिस्ट में शामिल?
चुनाव आयोग के अनुसार, 2002 की वोटर लिस्ट से लिंकेज के दौरान जिन मतदाताओं के फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं—जैसे माता-पिता के नाम में स्पेलिंग गड़बड़ी, उम्र का असामान्य अंतर (माता-पिता और बच्चे के बीच 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा), असामान्य संख्या में बच्चे (कई मामलों में 6 से ज्यादा), या अन्य वैज्ञानिक रूप से असंभव लगने वाली एंट्री—उनके नाम इस कैटेगरी में डाले गए। आयोग ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि कई ऐसी डिस्क्रिपेंसी ‘विज्ञान के विरुद्ध’ हैं।मतदाताओं के लिए राहत और प्रक्रिया
कोर्ट के आदेश पर आयोग ने स्पष्ट किया है कि लिस्ट में नाम आने वाले मतदाताओं को अतिरिक्त 10 दिन का समय दिया जाएगा, जिसमें वे जरूरी दस्तावेज (जैसे माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड भी उम्र प्रमाण के तौर पर मान्य) जमा कर सकेंगे। दस्तावेज जमा करने पर रसीद मिलेगी और बाद में सुनवाई होगी, जहां व्यक्ति खुद या वकील/बूथ लेवल एजेंट की मदद से पेश हो सकता है। अगर पहले ही दस्तावेज जमा हो चुके हैं, तो कोई समस्या नहीं—सभी रिकॉर्ड BLO ऐप पर सुरक्षित रहेंगे। SIR की बाकी प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
राजनीतिक घमासान
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मुद्दे पर पहले से ही आंदोलन छेड़ रखा है। पार्टी का दावा है कि इस लिस्ट के जरिए लाखों (खासकर TMC समर्थक) मतदाताओं के नाम काटने की साजिश है। तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा था कि अदालत में हमने जीत हासिल की, अब चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त मिलेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कई बार इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।चुनाव आयोग ने राज्य सरकार, पुलिस और DGP को भी निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया सुचारू चले और कोई कानून-व्यवस्था की समस्या न हो। राज्य में विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने हैं, ऐसे में यह फैसला मतदाताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।