हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट
हावड़ा/कोलकाता । पश्चिम बंगाल की जूट इंडस्ट्री में गहराते संकट के बीच हावड़ा जिले की कई जूट मिलें बंद या आंशिक रूप से बंद हो गई हैं, जिससे हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर गहरा संकट मंडरा रहा है। हाल के महीनों में कच्चे जूट की भारी कमी, बांग्लादेश से निर्यात पर प्रतिबंध, कच्चे माल की ऊंची कीमतें और तैयार उत्पादों पर मूल्य सीमा (प्राइस फ्रीज) के कारण इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर उत्पादन कटौती, शिफ्ट रिडक्शन और मिल बंदी हो रही है।
हावड़ा में प्रमुख प्रभावित मिलें महादेव जूट मिल (बाली, हावड़ा): दिसंबर 2025 में अनिश्चितकालीन बंदी की घोषणा। करीब 1,000 मजदूर प्रभावित। मिल मालिकों ने कच्चे जूट की कमी और घाटे का हवाला दिया। बाली और हावड़ा के अन्य मिल: कई मिलों में कार्य दिवस 5-6 दिन तक सीमित, या आंशिक बंदी।

प्रवर्तन जूट मिल (कमरहट्टी, हावड़ा के पास): हाल ही में अचानक बंद, मजदूरों ने बीटी रोड पर विरोध प्रदर्शन किया और ट्रैफिक जाम लगाया।
राज्य स्तर पर: हाल के रिपोर्ट्स के अनुसार, 17 मिलें पूरी तरह बंद हैं, और 50,000-60,000 मजदूर बेरोजगारी के कगार पर। हावड़ा, हुगली और बैरकपुर बेल्ट सबसे ज्यादा प्रभावित।
संकट के मुख्य कारण- कच्चे जूट की कमी: बांग्लादेश ने सितंबर 2025 से कच्चे जूट के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया, जिससे भारत में सप्लाई चेन टूट गई। कीमतें ₹11,000 प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गईं।
मूल्य नियंत्रण: जूट कमिश्नर की अधिसूचना से तैयार उत्पाद (जैसे B-Twill बैग) की कीमत सितंबर 2025 स्तर पर फ्रीज, जबकि DA और मजदूरी बढ़ रही है। मिलें घाटे में चल रही हैं।
ट्रेड विवाद: भारत-बांग्लादेश जूट ट्रेड रो के कारण इंडस्ट्री पर सीधा असर। IJMA (Indian Jute Mills Association) ने चेतावनी दी कि मार्च 2026 तक आधी से ज्यादा मिलें बंद हो सकती हैं, जिससे 2 लाख+ मजदूर प्रभावित होंगे।
अन्य: होर्डिंग, ब्लैक मार्केटिंग और राज्य स्तर पर सप्लाई रेगुलेशन की कमी।
मजदूरों का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया –मजदूर यूनियंस (CITU, AICCTU आदि) ने हड़ताल, जुलूस और विरोध प्रदर्शन किए। कमरहट्टी और जगद्दल में बीटी रोड ब्लॉकेज।
टीएमसी राज्या सभा सांसद रितब्रत बनर्जी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर तीन उपाय सुझाए: कच्चे जूट की कीमत नियंत्रण, सप्लाई चैन सुधार और मिलों को राहत पैकेज।
टीएमसी ने केंद्र पर आरोप लगाया कि बांग्लादेश ट्रेड पॉलिसी से इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है।
राज्य सरकार ने ट्राइपार्टाइट मीटिंग बुलाई, जहां लेऑफ कम्पेंसेशन पर एडवाइजरी जारी करने और एंटी-होर्डिंग एक्शन पर सहमति बनी।
उद्योग की चेतावनी
IJMA ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो मार्च 2026 तक बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जिससे हावड़ा-हुगली जैसे इलाकों में सामाजिक-आर्थिक संकट गहरा सकता है। मजदूरों की मांग है कि बंद मिलों में 21 दिनों के अंदर लेऑफ घोषित किया जाए और वेतन दिया जाए। यह संकट पश्चिम बंगाल की जूट इंडस्ट्री को अस्तित्व के संकट में डाल रहा है, जहां लाखों परिवारों की आजीविका दांव पर लगी है। राज्य और केंद्र सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।