अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) की निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना

नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) की आधिकारिक डिजिटल मुद्राएं (सेंट्रल बैंक डिजिटल मुद्राएं – सीबीडीसी) को ऑनलाइन लिंक करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव क्रॉस-बॉर्डर व्यापार, व्यापार साझे और पर्यटन भुगतान को तेज, सस्ता और आसान बनाने का उद्देश्य है। साथ ही, यह कदम भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) पर की निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्ताव की मुख्य बातें आरबीआई ने सरकार को सलाह दी है कि यह प्रस्ताव 2026 ब्रिक्स समिति के एजेंडे में शामिल किया जाएगा, भारत का स्वागत करेगा। अगर प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो यह ब्रिक्स में पहली बार आधिकारिक डिजिटल एक्सचेंज को इंटरकनेक्ट करने की कोशिश होगी।
फोकस: सदस्य देशों के सीबीडीसी (जैसे भारत का ई-रुपया) के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (परस्पर संगतता) लाभ, ताकि ट्रांजेक्शन तेज और कम खर्चीला हो।
लाभ: व्यापारिक और पर्यटन स्थलों में सेटलमेंट को बढ़ावा, स्विफ्ट जैसी पारंपरिक प्रणाली को बढ़ावा, और स्थानीय मुद्राओं को सेटलमेंट को बढ़ावा।
पृष्ठभूमि और कारण
यह प्रस्ताव 2025 ब्रिक्स समिति (रियो डी जनेरियो) में घोषित किया गया है, जिस पर आधारित है, जहां सदस्य देशों ने सिस्टम में बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट (19 जनवरी 2026) के मुताबिक, दो अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि आरबीआई ने सरकार को यह सलाह दी है। विशेषज्ञ का मानना है कि: भू-राजनीतिक तनाव (रूस-यूक्रेन, अमेरिका-चीन) के कारण यूएसडी-आधारित सिस्टम में जोखिम बढ़ गया है।
ब्रिक्स देशों में सीबीडीसी पहले से ही पायलट या लॉन्च किए गए हो चुके हैं (भारत के ई-रुपी पायलट चरण में है)। ब्रिक्स के बीच व्यापार से लिंक करना (जो पहले से ही स्थानीय मुद्रा में बढ़ रहा है) और आसान होगा।
प्रभाव प्रभाव सकारात्मक: ट्रांजेक्शन कास्ट कम, स्पीड स्टैण्ड, और ब्रिक्स ब्लॉक की आर्थिक एकता मजबूत होगी। भारत जैसे देश के लिए एक्सपोर्ट-इनपोर्ट में लाभ।
वैज्ञानिक: तकनीकी इंटीग्रेशन, साइबर साइंस, रेगुलेटरी इंटरएक्टिव, और सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक।
वैश्विक स्तर पर: यह USD के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है, हालांकि पूर्ण विकल्प नहीं बन पाएगा।
आरबीआई और सरकार की स्थिति
आरबीआई ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मतोहित के मुताबिक यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। अगर 2026 समिति में चर्चा होती है, तो यह ब्रिक्स के “डिजिटल पैनल रिवॉल्यूशन” का बड़ा कदम होगा।