
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करना चाहिए-कांग्रेस
प्रयागराज/नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026 । प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में ज्योतिष पीठ (बद्रीनाथ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर विवाद तेज हो गया है। माघ मेला प्राधिकरण ने सोमवार को उन्हें एक नोटिस जारी किया, जिसमें उनके नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ उपाधि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया और 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक सिविल अपील का हवाला दिया गया, जिसमें 2022 में कोर्ट ने आदेश दिया था कि मामले के निपटारे तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का कोई पट्टाभिषेक (अभिषेक) नहीं हो सकता।
विवाद की शुरुआत
विवाद की जड़ मौनी अमावस्या (19 जनवरी 2026) के महास्नान से जुड़ी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी शोभायात्रा (पालकी सवार) में संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोका। आरोप है कि उनके अनुयायियों (200-300 लोग) के साथ धक्का-मुक्की हुई, कुछ घायल हुए। स्वामी ने इसे “अपमान” बताया और फुटपाथ पर धरना शुरू कर दिया। वे माफी की मांग पर अड़े हैं और कह रहे हैं कि माफी के बिना अपने शिविर में नहीं लौटेंगे।उन्होंने तंज कसा: “प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं? उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री तय करेगा या भारत का राष्ट्रपति?”
मेला प्राधिकरण का नोटिस
प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दयानंद प्रसाद द्वारा जारी नोटिस में कहा गया: शिविर के बोर्ड पर ‘शंकराचार्य’ लिखा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। कोई भी धर्माचार्य अभी ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नहीं बन सकता। 24 घंटे में स्पष्टीकरण दें, अन्यथा कार्रवाई।यह नोटिस विवाद को और भड़का रहा है, क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 2017 से ज्योतिष पीठ के प्रमुख हैं, लेकिन उत्तराधिकार पर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है।
कांग्रेस का तीखा विरोध
कांग्रेस ने इस घटना को “सनातन परंपरा पर हमला” और “अभूतपूर्व अपमान” करार दिया। कांग्रेस मीडिया एवं प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: “क्या कोई सरकार हिंदू संत की स्थिति पर सवाल उठा सकती है? पहले मुसलमानों से ‘कागज दिखाओ’ कहा जाता था, अब शंकराचार्य से भी कागज मांगे जा रहे हैं।” “यह बीजेपी सरकार की अहंकारपूर्ण कार्रवाई है। धर्म और आस्था का कोई सम्मान नहीं।” “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करना चाहिए। यह शर्मनाक घटना है।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले राम मंदिर (अधूरा निर्माण), कोविड में गंगा में लाशें, कुंभ मेला प्रबंधन जैसी बातों पर बीजेपी की आलोचना की थी, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने मांग की कि यूपी सरकार माफी मांगे और स्वामी को सम्मानपूर्वक स्नान करने दे।अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं समाजवादी पार्टी के नेता उदित राज ने कहा: “शंकराचार्य के साथ अन्याय हुआ। सरकार उनको टारगेट करती है जो उसके साथ नहीं चलते।”
अखिलेश यादव ने स्वामी से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रोका। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और अजय राय ने इसे “सनातन संस्कृति का अपमान” बताया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख
स्वामी ने कहा: “शंकराचार्य का फैसला शंकराचार्य करते हैं, न कि प्रशासन। यह आस्था और सम्मान का मामला है।” उनका धरना जारी है, और समर्थक बड़ी संख्या में जुट रहे हैं।यह विवाद माघ मेले में धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक नियमों और राजनीति के बीच टकराव को उजागर कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट केस के फैसले तक तनाव बरकरार रह सकता है। कांग्रेस इसे बीजेपी के “हिंदू विरोधी” रुख के खिलाफ हथियार बना रही है।