
नई दिल्ली, 8 दिसंबर । संसद का शीतकालीन सत्र आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां निचले सदन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा का आयोजन किया जा रहा है। यह गीत, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों का प्रेरणा स्रोत बना, आज फिर से राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोपहर 12 बजे इस बहस की शुरुआत करेंगे , जबकि राज्यसभा में कल (9 दिसंबर) गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का नेतृत्व करेंगे। कुल 10 घंटे की इस बहस में गीत के ऐतिहासिक महत्व, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत मंथन होगा।

‘वंदे मातरम’ का सफर: 150 वर्षों की प्रेरणा कथा
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी, जो बंगाली साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में पहली बार प्रकाशित हुई। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने संगीतमय रूप दिया। यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का प्रतीक बना और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए नारा। 1930 के दशक में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला, लेकिन 1937 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में कुछ छंदों को हटाने का विवाद भी जुड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर को दिल्ली में इसकी 150वीं वर्षगांठ पर वर्ष भर के उत्सव का शुभारंभ किया था। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम मात्र शब्द नहीं, बल्कि एक मंत्र, ऊर्जा और संकल्प है। यह मां भारती के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।” सरकार ने युवाओं और छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं, ताकि इस गीत की भावना नई पीढ़ी तक पहुंचे।
संसद में चर्चा का स्वरूप: पीएम मोदी की शुरुआत, विपक्ष की भागीदारी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में 2 दिसंबर को हुई सर्वदलीय बैठक में इस चर्चा पर सहमति बनी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 8 दिसंबर को लोकसभा में दोपहर 12 बजे से बहस शुरू होगी, जिसमें एनडीए को 3 घंटे का समय मिला है। पीएम मोदी के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बहस का समापन करेंगे।
विपक्षी दलों ने भी सक्रिय भागीदारी की तैयारी की है।
कांग्रेस की ओर से आठ प्रमुख नेता बोलेंगे, जिनमें लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाद्रा, दीपेंद्र हुड्डा, विमल अकोइजम, प्रणिति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत शामिल हैं। अन्य दलों जैसे तृणमूल कांग्रेस ने भी स्वागत किया है। इंडिया गठबंधन के नेता मल्लिकार्जुन खाड़गे ने रणनीति बैठक में कहा कि यह चर्चा राष्ट्र निर्माण के लिए उपयोगी होनी चाहिए।
राज्यसभा में कल दोपहर 12 बजे चर्चा होगी, जहां अमित शाह शुरुआत करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा दूसरे वक्ता होंगे। यह एक-एक दिन की बहसें शीतकालीन सत्र (1-19 दिसंबर) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
राजनीतिक तापमान: विवाद के बादल मंडरा रहे
हालांकि सहमति बनी है, लेकिन बहस में तीखी बयानबाजी के आसार हैं। बीजेपी ने कांग्रेस पर 1937 में गीत के कुछ छंद हटाने का आरोप लगाया है, जिसे पीएम मोदी ने “विभाजन की बीज बोने” से जोड़ा। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “नेहरू की कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर गीत को खंडित किया। यह उनकी छद्म धर्मनिरपेक्षता थी।” वहीं, कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक संदर्भ में रखा और कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने ही संशोधन सुझाया था।
भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा, “बीजेपी-आरएसएस राष्ट्रवाद का ढोंग कर रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।” बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने अपील की, “पक्षपात भूलकर सभी दल राष्ट्रीय एकता को मजबूत करें।” पहले दो दिनों में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पर हंगामे से सत्र बाधित हुआ था, लेकिन विपक्ष ने हंगामा न करने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्रीय एकता का संदेश: क्यों महत्वपूर्ण है यह चर्चा?
यह चर्चा केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि समसामयिक भी है। ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता आंदोलन में लाखों लोगों को एकजुट किया, लेकिन धार्मिक संवेदनशीलता के नाम पर विवादों का शिकार भी बना। आज, जब देश सामाजिक-आर्थिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा है, यह गीत युवाओं को प्रेरित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहस से गीत के सांस्कृतिक महत्व पर नई रोशनी पड़ेगी।
संसद भवन के बाहर ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है, जबकि अंदर देश की राजनीति के प्रमुख चेहरे इसकी विरासत को रेखांकित करेंगे। यह चर्चा न केवल इतिहास को जीवंत करेगी, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नई दिशा भी देगी।