February 1, 2026

श्रीनगर, 13 नवंबर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग (CIK) ने गुरुवार को कश्मीर घाटी में 13 स्थानों पर व्यापक छापेमारी की, जो दिल्ली के लाल किले के पास हालिया कार विस्फोट से जुड़े ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ की जांच का हिस्सा है।

यह कार्रवाई अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के एक नेटवर्क पर केंद्रित थी, जो कथित तौर पर अल-कायदा से जुड़े हैं और भारत में जाली दस्तावेजों के जरिए घुसपैठ कर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त थे।
ऑपरेशन कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों जैसे अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम, श्रीनगर और उत्तरी कश्मीर के कुछ हिस्सों में की गई। CIK की टीमें स्थानीय पुलिस और क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) के साथ मिलकर काम कर रही थीं। कुल 13 जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाए गए, जहां संदिग्धों के ठिकानों की तलाशी ली गई।

जांचकर्ताओं ने ‘व्हाइट-कॉलर टेरर’ मॉड्यूल पर फोकस किया, जिसमें शिक्षित और पेशेवर लोग सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर आतंकी प्रोपेगैंडा फैला रहे थे। विशेष रूप से, अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का नेटवर्क टारगेट किया गया, जो अल-कायदा के गुजरात टेरर कॉन्स्पिरेसी से जुड़ा बताया जा रहा है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की समानांतर कार्रवाई में भी गुजरात, बंगाल और अन्य राज्यों में 10 जगहों पर छापे मारे गए, जहां चार बांग्लादेशी नागरिकों—मोहम्मद सोजिबमियान, मुन्ना खालिद अंसारी उर्फ मुन्ना खान, आजरुल इस्लाम उर्फ जहांगीर उर्फ आकाश खान, और अब्दुल लतीफ उर्फ मोमिनुल अंसारी—की पहचान हुई, जो जाली दस्तावेजों से भारत में घुसे थे।

छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज, डायरी और अन्य सामग्री जब्त की गई। दिल्ली विस्फोट के आरोपी डॉ. उमर उन नबी और डॉ. मुजम्मिल की डायरी से 8-12 नवंबर की तारीखें और लगभग 25 संदिग्धों के नाम (ज्यादातर जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद से) मिले, जो इस प्लानिंग से जुड़े थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *