February 1, 2026

मुंबई, 12 नवंबर। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान मुंबई को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने की दिशा में कड़ी चेतावनी दी है।
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर मुंबई को वाकई वैश्विक शहर के रूप में विकसित करना है, तो 2011 के बाद बनी अवैध झोपड़ियों को तुरंत हटाना अनिवार्य होगा। केवल तभी शहर में अच्छे उद्यान, पार्क और अन्य पायाभूत सुविधाओं का जाल बिछाया जा सकेगा।

यह टिप्पणी हाईकोर्ट की एक बेंच ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) से जुड़े एक मामले में की, जहां अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग उठी थी।कोर्ट का आदेश: 2011 के बाद की झोपड़ियां हटाओ, बिल्डर चयन में पारदर्शिता लाओबॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

कोर्ट ने कहा कि 2011 के बाद बनी सभी अवैध झोपड़ियों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए। साथ ही, SRA को बिल्डरों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए करने का आदेश दिया गया है, ताकि माफिया या मक्तेदारी की प्रवृत्ति को रोका जा सके। जस्टिस ने जोर देकर कहा, “मुंबई को इंटरनेशनल सिटी बनाना है, तो पहले इन अवैध निर्माणों से मुक्ति पाना जरूरी है। वरना शहर की सुंदरता और विकास की राह में ये बाधा बने रहेंगे।”यह मामला स्लम क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण और पुनर्वास योजनाओं की अनियमितताओं से जुड़ा है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि SRA की प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और पक्षपात है, जिससे गरीबों को उचित पुनर्वास नहीं मिल पा रहा। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सरकार और SRA को तीन महीने के अंदर कार्रवाई का रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।मुंबई की स्लम समस्या: आंकड़ों में झलकमुंबई, जिसे ‘सपनों का शहर’ कहा जाता है, वहां स्लम की समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है।

2011 की जनगणना के अनुसार, शहर की लगभग 41% आबादी स्लम क्षेत्रों में रहती है। लेकिन कोर्ट के अनुसार, 2011 के बाद बने अवैध ढांचे इस समस्या को और जटिल बना रहे हैं। इनमें से कई सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हैं, जो विकास परियोजनाओं को रोक रहे हैं। हाल के वर्षों में, BMC और SRA ने सैकड़ों अवैध निर्माण हटाए हैं, लेकिन नई झोपड़ियां लगातार उग आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई को सिंगापुर या दुबई जैसे इंटरनेशनल सिटी का दर्जा दिलाने के लिए न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च जरूरी है, बल्कि अवैध अतिक्रमण पर सख्ती भी। कोर्ट ने इस दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है, लेकिन क्रियान्वयन पर सवाल बाकी हैं।

सरकार और SRA का क्या कहना?महाराष्ट्र सरकार और SRA ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि वे अवैध झोपड़ियों को हटाने के लिए विशेष अभियान चला रही हैं। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्राउंड लेवल पर कार्रवाई धीमी है।

डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने पहले भी स्लम पुनर्वास योजनाओं पर जोर दिया है, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि ‘कानून अवैधता को पुरस्कृत नहीं कर सकता’।भविष्य की राह: पारदर्शिता और सख्ती की जरूरतयह फैसला मुंबई के शहरी विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अगर SRA लॉटरी सिस्टम लागू करती है और अवैध निर्माण हटाने में तेजी लाती है, तो शहर में नए पार्क, मेट्रो प्रोजेक्ट और हाई-राइज डेवलपमेंट को गति मिलेगी। हालांकि, प्रभावित निवासियों के पुनर्वास का इंतजाम भी उतना ही महत्वपूर्ण है, वरना सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

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