
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरपयोग के बारे में जजों को भी मालूम है। भारत के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने सोमवार कहा कि न्यायपालिका के लोगों को भी मॉर्फ्ड तस्वीरों के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकों को नियंत्रित करने की पहल कार्यपालिका की ओर से होनी चाहिए, न्यापालिका से नहीं। दरअसल, आज समाज का बड़ा तबका किसी न किसी रूप से एआई के दुरुपयोग की वजह से परेशानी महसूस कर रहा है।
अदालत ने माना नीतिगत मामला
सीजेआई बीआर गवई की अगुवाई वाली इस बेंच में जस्टिस के विनोद चंद्रन भी शामिल हैं। बेंच ने उभरती तकनीकों को संचालित करने के सवालों को पूरी तरह से नीतिगत मामला मानते हुए इसमें दखल देने में अपनी अनिच्छा जाहिर की। हालांकि, वकील के आग्रह पर इस मामले में सुनवाई को दो हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया।
केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है
एडवोकेट कार्तिकेय रावल की ओर से दायर इस पीआईएल के पक्ष में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अभिनव श्रीवास्तव ने भी बहस में हिस्सा लिया। याचिका में अदालत से यह मांग की गई कि न्यायिक व्यवस्था के अंदर GenAI के इस्तेमाल को निर्धारित करने को लेकर कानून बनाने या एक विस्तृत नीति तैयार करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया जाए, ताकि इसे रेगुलेट किया जाए और इसके इस्तेमाल में एकरूपता बनी रहे।